प्रपत्र-3 क्या है? सर्वे के समय यह फॉर्म क्यों जरूरी है, जानिए पूरा नियम
बिहार में चल रहे जमीन सर्वे के दौरान कई लोगों को प्रपत्र-3 के बारे में जानकारी नहीं होती। यह फॉर्म खासतौर पर जमीन के स्वामित्व और परिवार के हिस्से को रिकॉर्ड करने के लिए उपयोग किया जाता है। अगर इस फॉर्म में सही जानकारी नहीं दी गई तो बाद में जमीन विवाद भी हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि प्रपत्र-3 क्या है और इसे कब भरना पड़ता है।
प्रपत्र-3 का उपयोग कब होता है
यह फॉर्म उन मामलों में उपयोग होता है जहां जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट करना जरूरी होता है।
- जब जमीन कई परिवार के सदस्यों में बंटी हुई हो।
- जब खतियान में पुराना मालिक दर्ज हो।
- जब सर्वे टीम को स्वामित्व की पुष्टि करनी हो।
इस फॉर्म में कौन-कौन सी जानकारी देनी होती है
प्रपत्र-3 में जमीन से जुड़ी कई जरूरी जानकारी मांगी जाती है।
- जमीन मालिक का नाम और पिता का नाम।
- खाता और खेसरा नंबर।
- परिवार के अन्य हिस्सेदारों की जानकारी।
गलत जानकारी देने से क्या समस्या हो सकती है
अगर इस फॉर्म में गलती हो जाए तो बाद में जमीन रिकॉर्ड गलत बन सकता है।
- जमीन किसी दूसरे नाम से दर्ज हो सकती है।
- भविष्य में बंटवारा विवाद हो सकता है।
- सुधार के लिए अलग आवेदन करना पड़ सकता है।
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