बिहार सर्वे जानकारी
जमीन सर्वे फॉर्म, वंशावली, आपत्ति आवेदन और अन्य प्रक्रियाओं को आसान भाषा में समझें।
प्रपत्र-2 कैसे भरें? जानिए 100% सही तरीका ताकि आपकी जमीन का 1 इंच भी न कटे!
बिहार भूमि सर्वे में 'प्रपत्र-2' आपका सबसे बड़ा हथियार है। इसे 'स्व-घोषणा पत्र' भी कहते हैं। समझ लीजिए कि यह फॉर्म भरके आप सरकार को बता रहे हैं कि 'ये जमीन मेरी है और इसका असली मालिक मैं हूँ'। अगर आपने इस फॉर्म में एक भी नंबर गलत भर दिया या कट-पीट कर दी, तो आपकी पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम चढ़ सकती है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इसे बिना गलती किए कैसे भरना है।
बिहार भूमि सर्वे 2027 तक टलेगा? जानिए जमीन मालिकों के लिए क्या है बड़ी खबर!
अगर आपने अभी तक अपनी जमीन के कागज तैयार नहीं किए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बिहार में भूमि सर्वे का काम कई जगह काफी धीमा चल रहा है। पुराने कागजात न मिलने और वंशावली में देरी के कारण पूरी संभावना है कि यह सर्वे 2027 तक चलेगा। इसका मतलब है कि आपके पास अपने दस्तावेज सुधारने का पूरा मौका है।
सावधान! बिहार सर्वे में 'प्रपत्र-2' नहीं भरा तो छिन सकती है आपकी जमीन
प्रपत्र-2 आपके लिए एक तरह का 'दावा' है। सरकार घर-घर आकर नहीं पूछेगी कि कौन सी जमीन आपकी है। आपको खुद प्रपत्र-2 भरकर सरकार को बताना होगा कि यह जमीन मेरी है। अगर आप यह फॉर्म नहीं भरते हैं, तो आपकी जमीन किसी और के नाम चढ़ सकती है या उसे 'सरकारी' घोषित किया जा सकता है।
खतियान या रसीद में नाम गलत है? बिना ब्लॉक के चक्कर काटे ऐसे करें सुधार
कई बार टाइपिंग मिस्टेक या पुराने अमीन की गलती की वजह से जमीन के मालिक का नाम 'राम कुमार' से 'श्याम कुमार' हो जाता है। अगर सर्वे से पहले इसे नहीं सुधारा गया, तो नई लिस्ट में भी नाम गलत ही छप जाएगा। अच्छी बात यह है कि इसे सुधारना अब बहुत आसान है।
अमीन के आने से पहले रेडी रखें ये 5 कागज, वरना रुक जाएगा काम
आधी-अधूरी तैयारी से सर्वे में आपकी फाइल रिजेक्ट हो सकती है। जब सर्वे अधिकारी आपके गांव आएं, तो आपको इधर-उधर भागना न पड़े, इसलिए अपनी एक पक्की फाइल आज ही तैयार कर लें।
चाचा-भतीजे या पड़ोसी से चल रहा है जमीन विवाद? सर्वे में ऐसे करें अपना बचाव
बिहार में जमीन का झगड़ा और मेड़ (डनेर) काटने का विवाद आम बात है। सर्वे के दौरान अगर कोई दबंग या पट्टीदार आपकी जमीन पर अपना हक जताता है, तो आपको डरकर चुप नहीं बैठना है। कानून आपके साथ है।
खाता, खेसरा और जमाबंदी क्या है? बिल्कुल आसान भाषा में समझिए
जमीन के कागजात देखते समय 'खाता' और 'खेसरा' जैसे शब्द सिर के ऊपर से निकल जाते हैं? चिंता मत कीजिए, आइए इसे स्कूल के उदाहरण से बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
ब्लॉक के धक्के छोड़िए! मोबाइल से चुटकियों में भरें सर्वे के ऑनलाइन फॉर्म
प्रपत्र-2 हो या वंशावली, अब आपको फॉर्म खरीदने के लिए कचहरी या ब्लॉक के बाहर घंटों लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे अपने स्मार्टफोन से ये सभी फॉर्म जनरेट कर सकते हैं और प्रिंट निकाल सकते हैं।
सर्वे से पहले भाइयों में कर लें आपसी बंटवारा, वरना जिंदगी भर रहेगा पछतावा
अगर आपके दादा-परदादा की जमीन अभी तक जॉइंट (संयुक्त) है, तो सर्वे का यह सबसे सुनहरा मौका है कि कागजों पर बंटवारा कर लिया जाए। अगर अभी अलग-अलग नाम से खतियान नहीं बना, तो आपके बच्चों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे।
सर्वे अधिकारी ने रकबा कम कर दिया? इसे 'आपत्ति फॉर्म' से तुरंत कराएं सुधार
अगर सर्वे का शुरुआती ड्राफ्ट आने के बाद आपको पता चलता है कि आपका रकबा (जमीन का क्षेत्रफल) कम कर दिया गया है या किसी दूसरे का नाम जोड़ दिया गया है, तो चुप मत बैठिए। आपको तुरंत 'दावा-आपत्ति' दर्ज करानी चाहिए।
'रैयत' (जमीन मालिक) हैं आप? सर्वे में भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां
हर जमीन मालिक (रैयत) को सर्वे के कुछ नियम जरूर पता होने चाहिए। अक्सर लोग सोचते हैं कि अमीन आएगा और खुद सब सही कर देगा, यह उनकी सबसे बड़ी भूल होती है। एक छोटी सी लापरवाही आपकी पुश्तैनी जमीन को खतरे में डाल सकती है।
सरकार का बड़ा फैसला: अब अंचलाधिकारी (CO) का काम भी संभालेंगे BDO, जानिए आपको क्या होगा फायदा!
अगर आप भी ब्लॉक में जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) या नाम सुधार (परिमार्जन) कराने के लिए महीनों से चक्कर काट रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। बिहार सरकार ने भूमि सर्वे और जमीन से जुड़े रुके हुए कामों में रॉकेट जैसी तेजी लाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) भी सर्कल ऑफिसर (CO - अंचलाधिकारी) का काम संभालेंगे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इससे आम आदमी को क्या फायदा होगा।
बड़ी राहत! सरकार ने तय की 'परिमार्जन प्लस' की समय-सीमा, जानिए कितने दिन में सुधरेगा जमीन का कागज
जमीन की रसीद या जमाबंदी में नाम, खाता या खेसरा सुधारने के लिए लोगों को सालों तक ब्लॉक (अंचल कार्यालय) के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई है! बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 'परिमार्जन प्लस' लॉन्च किया है और अधिकारियों के लिए सख्त डेडलाइन तय कर दी है। अब अंचलाधिकारी (CO) आपकी फाइल को महीनों तक दबाकर नहीं रख सकेंगे। आइए जानते हैं कि किस काम में कितने दिन लगेंगे।
सावधान! जमीन के फर्जी कागज लगाए तो सीधे FIR, होगी 7 साल की जेल!
बिहार में भूमि सर्वे और दाखिल-खारिज (Mutation) के दौरान कई लोग जाली केवाला या फर्जी खतियान लगाकर दूसरों की जमीन हड़पने की कोशिश करते हैं। अगर आपके गांव या पट्टीदारी में भी कोई ऐसा कर रहा है, तो उसके लिए बुरी खबर है! बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने जाली दस्तावेजों पर रोक लगाने के लिए अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है।
अब ड्रोन से होगा जमीन सर्वे! बिहार में शुरू हुई हाई-टेक मैपिंग, जानिए आपकी जमीन पर क्या असर पड़ेगा
बिहार में चल रहे भूमि सर्वे को अब और तेज और सटीक बनाने के लिए सरकार ने नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कई जिलों में अब ड्रोन और आधुनिक GPS मशीनों की मदद से जमीन का नक्शा तैयार किया जा रहा है। इससे जमीन की सही माप, सीमा विवाद और गलत रिकॉर्ड की समस्या को काफी हद तक खत्म करने की कोशिश की जा रही है। आइए समझते हैं कि ड्रोन सर्वे क्या है और इससे जमीन मालिकों को क्या फायदा होगा।
प्रपत्र-3 क्या है? सर्वे के समय यह फॉर्म क्यों जरूरी है, जानिए पूरा नियम
बिहार में चल रहे जमीन सर्वे के दौरान कई लोगों को प्रपत्र-3 के बारे में जानकारी नहीं होती। यह फॉर्म खासतौर पर जमीन के स्वामित्व और परिवार के हिस्से को रिकॉर्ड करने के लिए उपयोग किया जाता है। अगर इस फॉर्म में सही जानकारी नहीं दी गई तो बाद में जमीन विवाद भी हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि प्रपत्र-3 क्या है और इसे कब भरना पड़ता है।
सर्वे के समय जमीन विवाद हो जाए तो क्या करें? जानिए पूरा कानूनी तरीका
बिहार में भूमि सर्वे के दौरान कई जगहों पर जमीन सीमा को लेकर विवाद भी सामने आते हैं। जब दो लोगों के बीच जमीन की सीमा को लेकर झगड़ा हो जाता है तो सर्वे टीम तुरंत फैसला नहीं करती। इसके लिए एक प्रक्रिया होती है जिसे समझना जरूरी है।
नया खतियान कैसे चेक करें? सर्वे के बाद ऐसे देखें अपना जमीन रिकॉर्ड
बिहार में चल रहे भूमि सर्वे के बाद नया खतियान जारी किया जाएगा। कई लोगों को यह पता नहीं होता कि नया रिकॉर्ड कैसे चेक करें। अब सरकार ने इसे ऑनलाइन देखने की सुविधा भी दी है जिससे आप घर बैठे अपने जमीन का रिकॉर्ड देख सकते हैं।
ब्लॉक जाने की झंझट खत्म! 'बिहारभूमि पोर्टल' पर घर बैठे करें जमीन के ये 9 जरूरी काम
क्या आप भी रसीद कटवाने, नक्शा निकालने या म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) का स्टेटस चेक करने के लिए बार-बार ब्लॉक (अंचल कार्यालय) के चक्कर लगाते हैं? अगर हाँ, तो अब आपको अपना समय और पैसा बर्बाद करने की कोई जरूरत नहीं है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 'बिहारभूमि पोर्टल' पर 9 ऐसी जबरदस्त सेवाएं दी हैं, जिन्हें आप चाय पीते हुए अपने मोबाइल से ही कर सकते हैं।
मोबाइल से 2 मिनट में देखें अपनी जमीन की 'जमाबंदी'
जमाबंदी (Jamabandi) जमीन का वह सबसे पक्का सरकारी सबूत है, जो साबित करता है कि अंचल (ब्लॉक) के सरकारी रजिस्टर में आप ही उस जमीन के असली मालिक हैं। अगर आपकी जमीन की जमाबंदी ऑनलाइन नहीं दिख रही है, तो आप न तो जमीन की नई रसीद कटा सकते हैं, न बैंक से लोन ले सकते हैं और न ही भूमि सर्वे में आपका काम आसानी से होगा। आइए जानते हैं इसे अपने स्मार्टफोन से बिल्कुल फ्री में कैसे चेक करें।
खतियान या रसीद में नाम गलत है? बिना ब्लॉक गए 'परिमार्जन' से खुद करें ऑनलाइन सुधार!
जमीन के कागजात में अगर 'राम' की जगह 'श्याम' छप जाए या 10 डिसमिल जमीन 1 डिसमिल दिखे, तो रातों की नींद उड़ जाती है। पहले इसे सुधारने के लिए कर्मचारी के पीछे महीनों भागना पड़ता था, लेकिन अब बिहार सरकार के 'परिमार्जन' (Parimarjan) पोर्टल ने इसे बेहद आसान बना दिया है। आइए जानते हैं कि बिना एक भी रुपया घूस दिए, अपने मोबाइल से जमीन की डिटेल कैसे सुधारें।
बैंक से लोन लेना हो या फसल बीमा, मोबाइल से 5 मिनट में ऐसे बनाएं LPC (Land Possession Certificate)
अगर आप किसान हैं और बैंक से KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन लेना चाहते हैं, फसल बीमा कराना चाहते हैं या किसी सरकारी योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपसे LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र) मांगा जाता है। यह सर्टिफिकेट साबित करता है कि आज की तारीख में आप ही इस जमीन के मालिक हैं और इस पर कोई टैक्स बकाया नहीं है। अब LPC बनवाने के लिए ब्लॉक जाने की कोई जरूरत नहीं है!
पुश्तैनी खतियान या केवाला ऑनलाइन नहीं दिख रहा? अब घर बैठे सरकार से करवाएं 'स्कैन और अपलोड'
बिहार में जमीन का सर्वे चल रहा है और ऐसे में अगर आपका पुराना खतियान, जमाबंदी या जमीन का कागज इंटरनेट पर नहीं है, तो बड़ी परेशानी हो सकती है। पहले ऐसे दस्तावेजों की नकल निकालने के लिए लोगों को ब्लॉक या जिला रिकॉर्ड रूम (Record Room) के चक्कर काटने पड़ते थे और दलालों को पैसे देने पड़ते थे। अब बिहार सरकार ने इस झंझट को बिल्कुल खत्म कर दिया है! अगर आपका कोई भी राजस्व दस्तावेज (Revenue Document) ऑनलाइन नहीं है, तो आप अपने मोबाइल से सीधे सरकार को उसे खोजकर स्कैन करने का 'ऑर्डर' (Request) दे सकते हैं।
CO ने बिना आपकी बात सुने कर दिया दाखिल-खारिज? घबराएं नहीं, जानिए DCLR कोर्ट में अपील का अचूक तरीका
जमीन के मामलों में अक्सर ऐसा होता है कि कोई पट्टीदार फर्जी कागज लगाकर आपकी जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) अपने नाम कराने के लिए अप्लाई कर देता है। आप ब्लॉक में जाकर आपत्ति (Objection) भी दर्ज कराते हैं, लेकिन कई बार अंचलाधिकारी (CO) आपकी बात सुने बिना या आपकी आपत्ति को नजरअंदाज करके दाखिल-खारिज पास कर देते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा धोखा हुआ है, तो चिंता मत कीजिए। कानून आपको अपनी जमीन वापस पाने का पूरा मौका देता है।
वीर जवानों को नमन: बिहार में शहीद सैनिकों के परिवारों को मिलेगी मुफ्त सरकारी जमीन, नई बंदोबस्ती लागू
देश की सरहदों की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले वीर सपूतों के परिवारों (आश्रितों) के लिए बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक और सम्मानजनक कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 'नई बंदोबस्ती प्रक्रिया' लागू कर दी है। अब शहीद जवानों के परिवारों को दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा; सरकार उन्हें खेती करने या घर बनाने के लिए सम्मान के साथ सरकारी जमीन देगी। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस योजना में क्या-क्या मिलेगा।
बड़ी खबर: बिहार में अब नहीं रुकेगा जमीन का दाखिल-खारिज, CO की जगह ये नए अधिकारी पास करेंगे फाइल!
बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वे के कारण ब्लॉक के अंचलाधिकारियों (CO) पर काम का इतना भारी बोझ आ गया था कि आम लोगों के जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) महीनों से अटका पड़ा था। लोग परेशान थे कि सर्वे के बीच जमीन खरीदें या बेचें तो दाखिल-खारिज कैसे होगा? आम जनता की इसी परेशानी को देखते हुए बिहार सरकार (राजस्व विभाग) ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब CO साहब के अलावा 'सहायक बंदोबस्त अधिकारी' (ASO) और 'कानूनगो' भी आपकी फाइलें धड़ाधड़ पास करेंगे!
बिहार सरकार ने तय किए जमीन नापी (ई-मापी) के पक्के रेट, यहाँ देखें पूरी लिस्ट
गांव या शहर में जमीन नापी (Measurement) के नाम पर अमीन अक्सर मनमाना पैसा मांगते हैं। कई बार तो लोग हजार-दो हजार रुपये सिर्फ अमीन को बुलाने के लिए दे देते हैं और फिर भी महीनों काम नहीं होता। इस लूट और देरी को खत्म करने के लिए बिहार सरकार ने 'ई-मापी' (e-Mapi) सिस्टम लागू कर दिया है। सरकार ने जमीन नापने का पक्का 'सरकारी रेट' तय कर दिया है। अब आपको किसी बाबू या अमीन को नकद (Cash) देने की कोई जरूरत नहीं है!
बेतिया राज की 24,000 एकड़ जमीन पर सरकार का एक्शन: जानिए 60 दिन की आपत्ति, 90 दिन का निपटारा और 1986 का नया नियम!
बिहार के सबसे बड़े राजघरानों में से एक 'बेतिया राज' (Bettiah Raj) की संपत्तियों को लेकर बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। सालों से चल रहे विवादों, मुकदमों और भू-माफियाओं के अवैध कब्जों को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने 'बेतिया राज संपत्ति निहित अधिनियम-2024' और 'नियमावली-2026' लागू कर दी है। अगर आप या आपका कोई जानने वाला पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण या बिहार के किसी भी हिस्से में बेतिया राज की जमीन पर बसा है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार की नई नीति क्या है, किसे जमीन से बेदखल किया जाएगा और किसे हमेशा के लिए मालिकाना हक मिलेगा।
जमीन के कागजों से कोई छेड़छाड़ करेगा तो तुरंत बजेगी फोन की घंटी! जमाबंदी से ऐसे लिंक करें अपना मोबाइल नंबर
क्या आपको भी डर लगा रहता है कि कोई भू-माफिया या पट्टीदार चुपके से आपकी पुश्तैनी जमीन का रसीद या दाखिल-खारिज अपने नाम न करवा ले? अब आपकी यह चिंता हमेशा के लिए खत्म होने वाली है! बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने एक बहुत ही शानदार 'एसएमएस अलर्ट सेवा' (SMS Alert Service) शुरू की है। अब आपकी जमीन के रिकॉर्ड में कोई सुई के बराबर भी बदलाव करेगा, तो तुरंत आपके मोबाइल पर मैसेज आ जाएगा।
'दाखिल-खारिज' (Mutation) आखिर क्या होता है? जमीन खरीदने के बाद यह क्यों है सबसे जरूरी काम, आसान भाषा में समझें!
अक्सर लोग जमीन की रजिस्ट्री (केवाला) करवा कर चैन से बैठ जाते हैं और सोचते हैं कि अब वे उस जमीन के पक्के मालिक बन गए हैं। यह उनकी सबसे बड़ी भूल होती है! जब तक आप उस जमीन का 'दाखिल-खारिज' (Mutation) नहीं करवाते, सरकारी रिकॉर्ड में वह जमीन पुराने मालिक की ही रहती है। आइए, बिहार सरकार के नियमों के अनुसार बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि दाखिल-खारिज क्या है और यह क्यों जरूरी है।
पुराना खतियान या केवाला ऑनलाइन नहीं दिख रहा? भू-अभिलेख पोर्टल पर ऐसे मंगाएं डिजिटल कॉपी
भूमि सर्वे के समय सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि लोगों के पुराने कागजात (जैसे खतियान, जमाबंदी या डीड) ब्लॉक के रिकॉर्ड रूम में तो पड़े हैं, लेकिन इंटरनेट पर नहीं दिख रहे। अब ऐसे कागजातों की नकल निकालने के लिए आपको अंचल कार्यालय के चक्कर काटने या किसी बाबू को पैसे देने की जरूरत नहीं है। बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने एक बेहद शानदार सुविधा शुरू की है, जिससे आप घर बैठे अपने ऑफलाइन दस्तावेजों को खोजकर ऑनलाइन अपलोड करने का 'रिक्वेस्ट' डाल सकते हैं।
पुश्तैनी जमीन के बंटवारे का झंझट खत्म! 'पारिवारिक बंटवारा पोर्टल' से एक ही आवेदन में होगा सबका अलग-अलग दाखिल-खारिज
बिहार में जमीन के 80% झगड़े सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि पुश्तैनी जमीन (दादा-परदादा की जमीन) का भाइयों के बीच सही से बंटवारा नहीं हुआ होता है। लोग आपसी बंटवारा तो कर लेते हैं, लेकिन अलग-अलग म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराने के लिए उन्हें ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने 'पारिवारिक बंटवारा पोर्टल' नाम से एक नई और जबरदस्त ऑनलाइन सेवा शुरू की है।
जमीन नेट पर नहीं दिख रही या रिकॉर्ड में गलती है? 'परिमार्जन प्लस' से घर बैठे करें सुधार और डिजिटलीकरण
क्या आपकी जमीन की पुरानी रसीद तो कट रही है लेकिन इंटरनेट पर (डिजिटाइज्ड जमाबंदी में) आपका नाम नहीं दिख रहा? या फिर ऑनलाइन रिकॉर्ड में आपका खाता, खेसरा या नाम गलत चढ़ गया है? अब आपको इन गलतियों को सुधारने के लिए अंचल कार्यालय (ब्लॉक) के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। बिहार सरकार के नए 'परिमार्जन प्लस' (Parimarjan Plus) पोर्टल से आप ये दोनों काम अपने मोबाइल या लैपटॉप से खुद कर सकते हैं।
दाखिल-खारिज (Mutation) का फॉर्म बार-बार हो रहा है रिजेक्ट? जमीन खरीदने से पहले गांठ बांध लें ये 8 सरकारी नियम
क्या आपने हाल ही में लाखों रुपये की गाढ़ी कमाई से कोई जमीन खरीदी है, लेकिन ब्लॉक (अंचल) से आपका दाखिल-खारिज (Mutation) रिजेक्ट हो गया है? बिहार में हर दिन हजारों दाखिल-खारिज के आवेदन सिर्फ अज्ञानता और छोटी-छोटी गलतियों की वजह से रद्द कर दिए जाते हैं। आपकी परेशानी बचाने के लिए बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने 8 ऐसे जरूरी नियम जारी किए हैं, जिनका पालन किए बिना आपका दाखिल-खारिज पास होना नामुमकिन है। आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
बड़ी खुशखबरी! खत्म हुई राजस्व अधिकारियों (CO) की हड़ताल, 4 मई से धड़ाधड़ पास होंगे रुके हुए दाखिल-खारिज
अगर आपका जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन या LPC पिछले दो महीने से ब्लॉक में अटका पड़ा है और आप परेशान हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है! बिहार में 9 मार्च से हड़ताल (सामूहिक अवकाश) पर गए सभी राजस्व अधिकारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। सरकार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि 4 मई से सभी अंचल कार्यालयों में जमीन के काम फिर से 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से शुरू होने वाले हैं। इस खबर को अपने परिवार वालों को जरूर शेयर करें!
परिवार में आपसी सहमति नहीं है? बिना झगड़े पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कराने का 100% सही और कानूनी तरीका
पुश्तैनी (दादा-परदादा की) जमीन का बंटवारा तब बहुत आसान होता है जब सभी भाई या हिस्सेदार एक साथ बैठकर सहमति से पंचनामा बना लें। लेकिन असली परेशानी तब आती है जब परिवार का कोई सदस्य बंटवारे के लिए तैयार न हो, कोई एक भाई पूरी जमीन पर कब्जा करके बैठा हो, या हिस्सेदारी को लेकर विवाद हो। ऐसे में लोग अक्सर मारपीट या झगड़े पर उतर आते हैं, जो बिल्कुल गलत है। अगर आपके परिवार में भी आपसी सहमति नहीं बन पा रही है, तो घबराएं नहीं। भारत के कानून और बिहार सरकार के नियमों के तहत आप बिना किसी झगड़े के अपना पूरा हक ले सकते हैं। आइए जानते हैं इसका सही और पक्का कानूनी रास्ता क्या है।
बिहार भूमि सर्वे में होने जा रहा है सबसे बड़ा बदलाव, अब अमीन और बाबू नहीं, 'AI' करेगा जमीन के कागजातों की जांच!
बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वे में अब एक बहुत बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। कागजों की जांच में होने वाली देरी, इंसानी गलतियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का इस्तेमाल करने जा रही है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नई 'AI तकनीक' से गांव के आम किसानों और जमीन मालिकों को क्या फायदा होगा।
घर बैठे मोबाइल से बनाएं 'LPC' (दखल-कब्जा प्रमाण पत्र)
अगर आप किसान हैं या जमीन के मालिक हैं, तो आपने 'LPC' (Land Possession Certificate) का नाम जरूर सुना होगा। चाहे बैंक से KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन लेना हो, फसल नुकसान का मुआवजा पाना हो या 'पीएम किसान' योजना का पैसा, हर जगह अंचल अधिकारी (CO) द्वारा जारी किया गया LPC ही काम आता है। पहले इसे बनवाने के लिए हफ्तों ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ते थे और दलालों को पैसे देने पड़ते थे। लेकिन अब बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने 'भूमि दखल-कब्जा प्रमाण पत्र' बनवाने की पूरी सुविधा ऑनलाइन कर दी है!
दाखिल-खारिज या जमीन नापी में कोई मांगे घूस, तो खैर नहीं! बिहार राजस्व विभाग में EOU की स्पेशल टीम तैनात
क्या ब्लॉक का कर्मचारी आपके दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन या रसीद काटने के नाम पर पैसों की मांग कर रहा है? अगर हाँ, तो अब आपको डरने या अपनी गाढ़ी कमाई लुटाने की कोई जरूरत नहीं है! बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने आम जनता को परेशान करने वाले भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। घूसखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग के अंदर सीधे 'आर्थिक अपराध इकाई' (EOU - Economic Offences Unit) की एक स्पेशल पुलिस टीम बैठा दी गई है। आइए जानते हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले से आपको क्या फायदा होगा।
अधिकारियों में हड़कंप! मंत्री जी खुद करेंगे मॉनिटरिंग, 25 मई से धड़ाधड़ पास होंगे दाखिल-खारिज और परिमार्जन के पेंडिंग मामले
अगर आपका दाखिल-खारिज, परिमार्जन या जमीन नापी का काम ब्लॉक (अंचल) में महीनों से अटका पड़ा है, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है! राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए माननीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 25 मई से 11 जून 2026 तक मंत्री जी खुद हर दिन 3 जिलों के अधिकारियों के साथ सीधे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) करेंगे और पेंडिंग फाइलों का हिसाब मांगेंगे। आइए जानते हैं सरकार के इस कड़े 'एक्शन प्लान' से आम जनता को क्या-क्या फायदे होंगे।
बिहार सर्वे फॉर्म ऑनलाइन बनाएं
अब सर्वे से जुड़े सभी आवेदन और दस्तावेज़ कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन तैयार करें।