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वीर जवानों को नमन: बिहार में शहीद सैनिकों के परिवारों को मिलेगी मुफ्त सरकारी जमीन, नई बंदोबस्ती लागू

देश की सरहदों की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले वीर सपूतों के परिवारों (आश्रितों) के लिए बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक और सम्मानजनक कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 'नई बंदोबस्ती प्रक्रिया' लागू कर दी है। अब शहीद जवानों के परिवारों को दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा; सरकार उन्हें खेती करने या घर बनाने के लिए सम्मान के साथ सरकारी जमीन देगी। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस योजना में क्या-क्या मिलेगा।

कितनी मिलेगी जमीन? (परिवार को मिलेगा विकल्प)

शहीद के परिवार को किस चीज की ज्यादा जरूरत है, इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने दो विकल्प (Options) दिए हैं। परिवार अपनी मर्जी से इनमें से कोई एक चुन सकता है:

  • कृषि (खेती) हेतु 1 एकड़: अगर शहीद का परिवार खेती-किसानी करके अपना जीवन यापन करना चाहता है, तो सरकार उन्हें पूरे 1 एकड़ कृषि योग्य सरकारी जमीन देगी।
  • आवास (घर) हेतु 5 डिसमिल: अगर परिवार के पास रहने के लिए अपना पक्का मकान नहीं है, तो उन्हें घर बनाने के लिए 5 डिसमिल (Decimal) जमीन दी जाएगी।

यह जमीन कहाँ दी जाएगी?

अक्सर सरकारी योजनाओं में जमीन बहुत दूर दे दी जाती है, जिससे परिवार को परेशानी होती है। लेकिन इस योजना में ऐसा नहीं होगा।

  • गृह जिले में ही मिलेगी जमीन: सरकार का सख्त निर्देश है कि शहीद के परिवार को उनके अपने ही 'गृह जिले' (Home District) के ग्रामीण क्षेत्र में यह जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
  • इससे परिवार को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज के बीच सम्मान से रहने में मदद मिलेगी।

जमीन देने (बंदोबस्ती) का पावर किसके पास होगा?

शहीद के परिवार को ब्लॉक के बाबुओं या कर्मचारियों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए सरकार ने पावर सीधे जिले के सबसे बड़े अधिकारी को दे दी है।

  • डीएम (समाहर्ता) करेंगे बंदोबस्ती: इस जमीन की बंदोबस्ती (Settlement/Allotment) का पूरा अधिकार सीधे जिले के कलेक्टर (DM / समाहर्ता) के पास रहेगा।
  • डीएम साहब खुद इस मामले की फाइल देखेंगे और सम्मान के साथ परिवार को जमीन के कागजात (Settlement Documents) सौंपेंगे।

इस योजना का लाभ कैसे लें?

चूंकि यह प्रक्रिया सीधे डीएम स्तर से जुड़ी है, इसलिए इसका तरीका बेहद साफ और पारदर्शी है।

  1. शहीद सैनिक के आश्रित (पत्नी, बच्चे या माता-पिता) अपने जिले के समाहरणालय (DM Office) में संपर्क कर सकते हैं।
  2. सैनिक कल्याण बोर्ड या जिला जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से भी इस बंदोबस्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन दिया जा सकता है।

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