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प्रपत्र-2 कैसे भरें? जानिए 100% सही तरीका ताकि आपकी जमीन का 1 इंच भी न कटे!

बिहार भूमि सर्वे में 'प्रपत्र-2' आपका सबसे बड़ा हथियार है। इसे 'स्व-घोषणा पत्र' भी कहते हैं। समझ लीजिए कि यह फॉर्म भरके आप सरकार को बता रहे हैं कि 'ये जमीन मेरी है और इसका असली मालिक मैं हूँ'। अगर आपने इस फॉर्म में एक भी नंबर गलत भर दिया या कट-पीट कर दी, तो आपकी पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम चढ़ सकती है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इसे बिना गलती किए कैसे भरना है।

फॉर्म छूने से पहले ये 4 पक्के कागज टेबल पर रख लें

फॉर्म भरते समय अगर आप बार-बार उठेंगे तो पक्का कोई गलती होगी। इसलिए पेन उठाने से पहले इन 4 चीजों को अपने सामने रख लें:

  • जमीन मालिक (रैयत) का असली आधार कार्ड
  • जमीन की नई कटी हुई रसीद (जिसमें चालू साल का लगान जमा हो)
  • जमीन का पुराना खतियान या खरीदी हुई जमीन है तो केवाला (Registry Paper)
  • मुखिया या सरपंच से साइन की हुई पारिवारिक वंशावली (अगर जमीन दादा-परदादा की है)

स्टेप 1: अपनी (रैयत की) सही-सही पहचान कैसे लिखें?

फॉर्म के सबसे ऊपरी हिस्से में आपको अपनी बेसिक जानकारी भरनी है। ध्यान रहे, स्पेलिंग वही लिखें जो आधार कार्ड में हो।

  • मौजा और थाना नंबर: 'मौजा' मतलब आपके गांव का नाम। आपके गांव का एक खास 'थाना नंबर' होता है, जो पुरानी रसीद या खतियान के सबसे ऊपर लिखा होता है, उसे हूबहू उतार दें।
  • अंचल और जिला: अपने ब्लॉक (अंचल) और जिले का नाम साफ अक्षरों में लिखें।
  • रैयत का नाम और पता: जिसके नाम से जमीन है उसका नाम, पिता/पति का नाम, मोबाइल नंबर और आधार नंबर बिल्कुल सही-सही भरें।

स्टेप 2: जमीन की डिटेल (सबसे मेन हिस्सा, यहाँ गलती मतलब जमीन गई!)

यह फॉर्म की जान है। सर्वे करने वाला अमीन (Surveyor) सिर्फ यही हिस्सा चेक करेगा, इसलिए इसे बहुत ध्यान से भरें।

  • खाता और खेसरा (Plot No.): पुरानी रसीद या खतियान से देखकर अपना खाता नंबर और खेसरा नंबर (प्लॉट नंबर) भरें। इसमें एक नंबर की भी गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।
  • रकबा (Area): आपकी जमीन कितनी बड़ी है? याद रखें, यहाँ फॉर्म में 'बीघा' या 'कट्ठा' नहीं लिखना है। रकबा हमेशा एकड़ और डिसमिल (Decimal) में ही लिखें (जैसे: 0 एकड़ 10 डिसमिल)।
  • चौहद्दी (Boundary): आपकी जमीन के चारों तरफ कौन है? उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम में जिनके भी खेत या घर हैं, उनका नाम साफ-साफ लिखें। सिर्फ 'सड़क' या 'खेत' लिखकर न छोड़ें।

स्टेप 3: जमीन दादा की है या खरीदी है? (सबूत के साथ लिखें)

अब सरकार को यह बताना है कि यह जमीन आपके पास आई कहाँ से।

  • अगर जमीन पुश्तैनी (बाप-दादा की) है: तो फॉर्म में 'खतियानी' या 'पैतृक' लिखें और साथ में अपनी वंशावली की फोटोकॉपी जरूर नत्थी (Pin) करें।
  • अगर जमीन आपने खुद खरीदी है: तो फॉर्म में 'केवाला' लिखें और अपनी डीड (Deed) का नंबर और खरीदने का साल जरूर बताएं।
  • लगान और दस्तखत: आप सरकार को कितना टैक्स देते हैं, रसीद से देखकर लिखें। अंत में अपना दस्तखत करें या अंगूठे का निशान लगाएं और आज की तारीख डाल दें।

फॉर्म भरते समय ये 3 बेवकूफियां कभी मत करना!

हजारों लोगों के फॉर्म इन 3 गलतियों की वजह से रिजेक्ट हो रहे हैं, आप यह गलती न करें:

  • ओवरराइटिंग (Overwriting): अगर फॉर्म भरते समय कुछ गलत हो जाए, तो उसे काट कर दोबारा उसी के ऊपर न लिखें (घिच-पिच न करें)। नया फॉर्म लेकर शुरू से भरें।
  • गलत रकबा (Measurement) भरना: कभी भी अंदाजे से जमीन बढ़ाकर मत लिखें। जितना कागज (खतियान/केवाला) पर लिखा है, सिर्फ उतना ही लिखें।
  • बिना सबूत के जमा करना: खाली फॉर्म ले जाकर जमा करने से कोई फायदा नहीं। फॉर्म के पीछे आधार, रसीद, वंशावली और खतियान की फोटोकॉपी स्टेपल करना बिल्कुल न भूलें।

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