दाखिल-खारिज (Mutation) का फॉर्म बार-बार हो रहा है रिजेक्ट? जमीन खरीदने से पहले गांठ बांध लें ये 8 सरकारी नियम
क्या आपने हाल ही में लाखों रुपये की गाढ़ी कमाई से कोई जमीन खरीदी है, लेकिन ब्लॉक (अंचल) से आपका दाखिल-खारिज (Mutation) रिजेक्ट हो गया है? बिहार में हर दिन हजारों दाखिल-खारिज के आवेदन सिर्फ अज्ञानता और छोटी-छोटी गलतियों की वजह से रद्द कर दिए जाते हैं। आपकी परेशानी बचाने के लिए बिहार सरकार (राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग) ने 8 ऐसे जरूरी नियम जारी किए हैं, जिनका पालन किए बिना आपका दाखिल-खारिज पास होना नामुमकिन है। आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
1. भूलकर भी न खरीदें ऐसी जमीनें (वरना पैसा डूब जाएगा)
सबसे ज्यादा दाखिल-खारिज इसी वजह से रिजेक्ट होते हैं क्योंकि लोग अनजाने में प्रतिबंधित (Prohibited) जमीन खरीद लेते हैं।
- सरकारी और खास जमीन: गैरमजरूआ आम, गैरमजरूआ खास, कैसरेहिन्द या बंदोबस्ती की जमीन बिल्कुल न खरीदें।
- सार्वजनिक जगह: भूदान, सैरात, बाजार, हाट, नदी, पईन, नहर, श्मशान, कब्रिस्तान, मठ और मन्दिर आदि की जमीन की खरीद-बिक्री गैर-कानूनी है। इसका म्यूटेशन कभी पास नहीं होगा।
2. जमीन खरीदने से पहले 3 जगह करें 'ऑनलाइन क्रॉस-चेक'
आंख मूंदकर किसी पर भरोसा न करें, सरकार के इन 3 नियमों को फॉलो करें:
- जमाबंदी चेक करें: हमेशा उसी व्यक्ति से जमीन खरीदें जिसके नाम से वर्तमान में 'जमाबंदी' (Jamabandi) कायम हो और ऑनलाइन रसीद कट रही हो।
- कागज और नक्शे का मिलान: जमीन का पूरा विवरण, नक्शा और बेचने वाले का नाम-पता 'biharbhumi.bihar.gov.in' पर जाकर जरूर मिला लें।
- डीड (Deed) की जांच: निबंधित दस्तावेजों (Registry Papers) की असली जांच निबंधन कार्यालय की वेबसाइट 'bhumijankari.bihar.gov.in' पर पहले ही कर लें।
3. जॉइंट (बिना बंटवारे वाली) जमीन से रहें दूर
पुश्तैनी जमीन के झगड़ों से बचने के लिए सरकार की यह सलाह बहुत काम की है:
- बिना पारिवारिक बंटवारे (Partition) वाली जमीन भूलकर भी न खरीदें।
- बंटवारे के बाद जब भाइयों का अलग-अलग खाता/जमाबंदी कायम हो जाए, तभी 'नए जमाबंदीदार' से जमीन खरीदें।
4. 'चौहद्दी' और 'कब्जे' का पक्का नियम
केवल खाता और खेसरा नंबर मिला लेना ही काफी नहीं है:
- चौहद्दी का मिलान: रजिस्ट्री करवाते समय खाता, खेसरा और रकबा (Area) के साथ-साथ 'चौहद्दी' (Boundary) का जमीन पर स्पष्ट मिलान जरूर कर लें।
- बाउंड्री करवा लें: जमीन की रजिस्ट्री और पैसे के लेन-देन से पहले ही कोशिश करें कि आप अपनी जमीन की बाउंड्री (चहारदीवारी) या सीमा की पक्की पहचान कर लें। इससे बाद में विवाद नहीं होगा।
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